
अनुभाग से लू के संदर्भ में तैयारी किया जाए एवं मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। इनमें रेड अलर्ट अर्थात् अत्यंत गंभीर लू की चेतावनी जो की सामान्य अधिकतम तापमान 6 डिग्री से अधिक तक बढ़ जाता है। ऑरेंज अर्लट लू की चेतावनी सामन्य अधिकतम तापमान 4 डिग्री से 5 डिग्री तक बढ़ जाता है। पीला अलर्ट गर्म दिन निकटतम सामान्य अधिकतम तापमान, सफेद सामन्य दिन सामान्य अधिकतम तापमान के नीचे हो। भारत मौसम विज्ञान द्वारा निर्धारित सीमा पर आधारित रंग संकेत प्रणाली अनुसार चेतावनी के बाद जारी किए जायेंगे।
मुख्य नगर पालिका एवं पंचायत अधिकारी
सभी सार्वजनिक स्थलों-बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार, पार्क, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों एवं अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर शीतल जल केंद्र (पॉटर कूलर, प्याऊ) की स्थापना सुनिश्चित की जाए। सड़क किनारे, फुटपाथों और खुले में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए अस्थायी विश्राम केंद्र बनाएं जाएं, जहां छाया, ठंडा पानी एवं प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध हो। सभी शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति निर्बाध रूप से सुनिश्चित की जाए एवं नगर निगम के टैंकरों द्वारा नियमित जल वितरण की योजना बनाई जा कचड़ा संग्रहण और सड़क सफाई कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए कार्य समय में समायोजन किया जाए, जिसमें वे अत्यधिक गर्मी के समय (दोपहर 12 से 4 बजे तक) कार्य करने से बच सके। सड़क किनारे एवं सार्वजनिक स्थलों पर वृक्षारोपण एवं ग्रीन हेड लगाने की योजना तैयार कर तुरंत लागू की जाए। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा लारी लू चेतावनियों को सार्वजनिक स्थली, डिजिटल डिस्प्ले बोडों, नगर निगम की वेबसाइट एवं सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाया जाए। नगर निगम के लाउडस्पीकर, एवं अन्य संचार माध्यमों द्वारा लू से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग एवं जनसंपर्क विभाग के समन्वय शहरी क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें बैनर, होर्डिंग, सोशल मीडिया, सामुदायिक बैठकें एवं वॉल पेटिंग का उपयोग किया जाए
ऑटो रिक्शा, बस चालकों, निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों एवं सफाई कर्मचारियों को लू से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए एवं उन्हें छायादार स्थानों पर विश्राम करने के लिए प्रेरित किया जाए। सभी प्रमुख बाजारों, सरकारी भवनों एवं सार्वजनिक स्थलों पर मिस्ट स्प्रे (डपेज ैचतंलमते) एवं वाटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम लगाया जाए ताकि वातावरण ठंडा रखा जा सके।
फायर ब्रिगेड एवं जल वितरण वाहनों का उपयोग कर प्रमुख सड़कों एवं बाजार क्षेत्रों में नियमित छिड़काव किया जाए। हीट स्ट्रोक से प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए एवं सभी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों को इस संबंध में सतर्क किया जाए। लू राहत केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां हीटवेव से प्रभावित लोगों को प्राथमिक चिकित्सा, ठंडा पानी एवं आराम की सुविधा मिल सके। नगरीय क्षेत्र में ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाए, जहां जरूरतमंदों को मुक्त ओआरएस व ठंडे पानी की सुविधा दी जाए। विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से ग्रीन कूलिंग प्रोग्राम लागू किया जाए, जिसमें ग्रीन शेल्टर, शीतल जल स्रोत एवं वृक्षारोपण अभियान को प्राथमिकता दी जाएं।
स्वास्थ्य विभाग
डॉट स्ट्रोका प्रबंधन हेतु प्रोटोकॉल के अनुसार जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला अस्पताल में आवश्यक दवाओं, ग्लूकोज, ओ. आर. एस. पैकेट्स एवं कूलिंग ट्रीटमेंट सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। हीटवे केस मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का पालन करने हेतु सभी विकित्सको, नहाँ एवं स्वास्थ्य कर्लिंगों को प्रशिक्षण दिया जाए सभी 108 और 102 एम्बुलेंस को निर्देशित किया जाए कि वे हीटवेथ आपात स्थिति में कंबल, कोल्ड पैक एवं हाइड्रेशन सपोर्ट से सुसज्जित रहें। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और एएनएम को निर्देशित किया जाए कि हीटवेध से प्रभावित व्यक्तियों की प्रारभिक पहचान एवं प्राथमिक उपचार में सहायता करें। गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों, मधुमेह रोगियों, उच्च रक्तचाप से ग्रस्त मरीजों एवं कुपोषित बच्चों की विशेष निगरानी की जाए, क्योंकि वे बीट स्ट्रोक के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। सभी शहरी एवं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में हीट हेल्थ डेस्क स्थापित की जाए, जहां लोग लू बचाव और उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त कर सके।
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी लू चेतावनी (भ्मंजूंअम ।समतजे) के आधार पर स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया जाए और सभी चिकित्सा केंद्रों को सतर्क रखा जाए। जिला अस्पताल में इमरजेंसी हीट स्ट्रोक यूनिट स्थापित की जाए, जहां गंभीर मरीजों का त्वरित उपचार हो सके। सभी एम्बुलेंस चालक एवं पैरामेडिक्स को थर्मल इमरजेंसी रिस्पॉन्स हेतु प्रशिक्षित किया जाए, ताकि हीट स्ट्रोक के मरीजों को सुरक्षित और शीघ्र उपचार मिले सके। निर्माण स्थानों, ईट भट्टों, बाजार क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पैरामेडिकल मोबाइल यूनिट्स (एम.एम.यू.) द्वारा लू से प्रभावित मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं ओआरएस उपलब्ध कराया जाए
लू से प्रभावित व्यक्तियों की नियमित चिकित्सीय जांच एवं फॉलो-अप किया जाए, ताकि पुनः लू के दुष्प्रभाव से बचाव हो सके। सभी सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाए, जिससे हीटवेव के दौरान आने वाले मरीजों का डेटा संकलित किया जा सके और आगे की रणनीति तैयार की जा सके। जिले में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाए, जहां आम नागरिकों को निःशुल्क ओ.आर.एस. एवं हाइड्रेशन पैक उपलब्ध कराया जाए। सार्वजनिक स्थलों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को लू से बचाव, सही खान-पान एवं हाइड्रेशन के महत्व की जानकारी दी जाए। गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों की पुनर्वास योजना तैयार की जाए, जिसमें उनकी नियमित स्वास्थ्य निगरानी, पोषण सहायता एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल हो।
महिला एवं बाल विकास विभाग
आंगनबाड़ी केंद्रों, पोषण पुनर्वास केंद्रों एवं अन्य बाल देखभाल केंद्रों में स्वच्छ पेयजल, छायादार स्थान एवं प्राथमिक उपचार किट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। गर्भवती एवं माताओं को लू से बचाव हेतु विशेष सावधानियों की जानकारी दी जाए, जिसमें पर्याप्त जल सेवन, हल्का भोजन करने एवं अनावश्यक रूप से धूप में न जाने के निर्देश शामिल हो। आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को लू के प्रभाव एवं बचाव के उपायों पर प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे समुदाय को जागरूक कर सकें। टीएचआर वितरण के दौरान महिलाओं को लू से बचाव के लिए विशेष परामर्श दिया जाए एवं उन्हें व पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित किया जाए। बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गर्मी के मौसम में आहार में परिवर्तन किया जाए एवं आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों का वितरण सुनिवित किया जाए। स्थानीय समुदायों में महिला समूहों, स्व-सहायता समूहों एवं ग्राम पंचायतों के सहयोग से लू से बचाव हेतु जन-जागरूकता अभियान चलाए जाए।
गर्मी के कारण बीमार होने वाले बच्चों एवं महिलाओं को त्वरित प्राथमिक उपचार एवं आवश्यकतानुसार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों में ओआरएस (व्त्ै) घोल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि डिहाइड्रेशन के मामलों में त्वरित उपचार किया जा सके। स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं कुपोषित बच्चों को नियमित अंतराल पर मॉनिटर किया जाए एवं अत्यधिक गर्मी में उनकी गतिविधियों को सीमित किया जाए।
लू से प्रभावित महिलाओं एवं बच्चों की पहचान कर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा एवं पोषण संबंधी सहायता प्रदान की जाए। समाज में कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु विभागीय स्तर पर विशेष अभियान संचालित किए जाएं। स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायतों, स्व-सहायता समूहों एवं महिला संगठनों के माध्यम से कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए।
जिला श्रम पदाधिकारी
सभी निर्माण स्थलों, ईट भट्टों, फैक्ट्रियों एवं अन्य श्रम स्थलों पर लू से बचाव हेतु शीतल जल की उपलब्धता, छाया युक्त विश्राम स्थल एवं प्राथमिक चिकित्रा सुविधा अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। सभी मजदूर यूनियनो, ठेकेदारों एवं नियोक्ताओं को निर्देशित किया जाए कि ये अपने कार्यस्थलो पर श्रमिकों के लिए ओ.आर.एस., पानी, छायादार विश्राम स्थल एवं प्राथमिक उपचार कीट की उपलब्धता सुनिश्चित करें। श्रमिकों को लू से बचने के उपायों की जानकारी देने के लिए जागरूकता शिविरों का आयोजन किए निर्माण कार्य, सड़क निर्माण एवं अन्या बाहरी श्रम कार्यों को दोपहर 12.00 बजे से 4.00 बजे के बीच स्थगित रखने या समायोजित करने हेतु निर्देश जारी किए जाए। श्रगिकों को हल्के रंग के कपड़े पहनने, सिर की ढकने, पानी का अधिक सेवन करने एवं सीधे धूप में कम समय बिताने हेतु प्रशिक्षित किया जाए। श्रमिक संगठनों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें पोस्टर, होर्डिंग्स, लाउडस्पीकर घोषणा एव सोशल मीडिया प्रचार शामिल हो।
श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निरीक्षण दल गठित किए जाएं, जो सुनिश्चित करें कि कार्य स्थलों पर लू से बचाव से सभी उपाय लागू किए गए हैं। निर्माण कार्य स्थलों, ईट भट्टों एवं फैक्टरियों में कार्यरत मजदूरों के लिए स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर मेडिकल मोबाइल यूनिट का संचालन किया जाए, जो प्रभावित श्रमिकों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराए। सभी औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों एवं श्रम कॉलोनियों में हीट स्ट्रोक आपातकालीन हेल्पलाइन की जानकारी दी जाए, जिससे श्रमिक किसी भी आपात स्थिति में सहायता प्राप्त कर सकें। सड़क निर्माण, सफाई कार्य एवं अन्य श्रम-प्रधान कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए कार्य अवधि में बदलाव किया जाए एवं अत्यधिक गर्मी में कार्य न करने की नीति अपनाई जाए। श्रम विभाग द्वारा नियोक्ताओं के साथ समन्वय कर श्रमिकों को हीटवेव एलाउंस एवं विश्राम अवकाश की सुविधा देने पर विचार किया जाए। औद्योगिक क्षेत्रों, श्रम बस्तियों एवं बाजार क्षेत्रों में ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाएं।
हीट स्ट्रोक से प्रभावित श्रमिकों की चिकित्सा एवं पुनर्वास योजना बनाई जाए, जिसमें नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पुनः कार्य हेतु अनुकूल वातावरण एवं पोषण सहायता दी जाए। निजी अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया जाए कि वे लू से प्रभावित श्रमिकों को निःशुल्क उपचार प्रदान करें एवं उनके लिए विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करें।
शिक्षा विभाग हेतु
सभी विद्यालयों, आगनबाड़ी केंद्रों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में शुद्ध पेयजल, छायादार स्थान एवं प्राथमिक उपचार किट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। स्कूल प्रशासन को निर्देशित किया जाए कि गर्मी के मौसम में सुबह की पाली में कक्षाएं संचालित करने पर विचार करें एवं अत्यधिक गर्मी के समय (12.00 से 4.00 बजे तक) शारीरिक गतिविधियों को सीमित करें। राज्य सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के दौरान स्कूलों के संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए एवं आवश्यकतानुसार गर्मी की छुट्टियों का पुनर्निर्धारण किया जाए। शिक्षकों एवं छात्रों को हीटवेव से बचाव के उपायों, हल्के कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने एवं धूप में अधिक समय न बिताने के संबंध में जागरूक किया जाए। केरला मॉडल पर आधारित वाटर बेल का निर्देश दिया जाये जिसमें हर 45 मिनिट पर एक बेल बजाएं एवं बच्चों को उनके द्वारा लायी हुई बोतल से पानी पीने को कहा जाये। सभी स्कूल बस चालकों एवं परिवहन सेवा संचालकों को निर्देश दिया जाए कि वे वाहनों में पीने के पानी सुविधा उपलब्ध कराए एवं अत्यधिक गर्मी में सावधानी पूर्वक वाहन चलाएं। स्कूलों में विशेष मॉर्निंग असेंबली सत्र आयोजित किए जाए, जिनमें लू से बचाव के उपायों पर चर्चा की जाए, चर्चा के लिए सुरक्षित शनिवार के अंतर्गत हीटवेव पर दी गयी जानकारी पर चर्चा करें इसे यूट्यूब पर इस लिंक द्वारा साझा किया जा सकता है। शिक्षा विभाग के सोशल प्लेट फार्मों पर लू से बचाव से संबंधित जानकारी साझा की जाए। शिक्षा विभाग के सहयोग से शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं, जिनमें वे हीटवेव प्रबंधन, प्राथमिक उपचार एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
स्कूलों में ओआरएस घोल एवं प्राथमिक उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए एवं आवश्यकता पड़ने पर छात्राओं एवं शिक्षकों को तत्काल चिकित्सा सहायता दी जाए। लू से प्रभावित छात्रों के लिए स्कूलों में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाए एवं गंभीर मामलों में उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाए। छात्रों एवं शिक्षकों के लिए विशेष परामर्श सत्र आयोजित किए जाएं, जिनमें लू के लक्षणों की पहचान एवं बचाव के तरीकों पर जानकारी दी जाए। स्कूलों एवं कॉलेजों में हीटवेव अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाए, जिसमें किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके। विद्यालय प्रबंधन समिति (ैडब्) एवं अभिभावकों को जागरूक किया जाए कि बच्चों को पर्याप्त पानी पीने, हल्का भोजन करने एवं खुले में अधिक समय न बिताने हेतु प्रोत्साहित करें।
लू से प्रभावित छात्रों एवं शिक्षकों की पहचान कर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा एवं परामर्श सहायता प्रदान की जाए। विद्यालयों में जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति न उत्पन्न हो।
पशुधन विकास विभाग
सभी गौशालाओं, डेयरी फार्मों, पोल्ट्री फार्मों एवं अन्य पशुपालन केंद्रों पर शीतल जल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सभी पशु पालकों को छायादार स्थलों की व्यवस्था करने, पशुओं को ठंडा पानी उपलब्ध कराने एवं उनकी दिनचर्या में परिवर्तन करने हेतु निर्देशित किया जाए। पशु चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में हीटवेव के कारण उत्पन्न बीमारियों के इलाज हेतु विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किया जाए। खुले में चरने वाले पशुओं के लिए तालाबों एवं जल स्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए एवं नए अस्थायी जल स्रोतों का निर्माण किया जाए। लू के मौसम में पशुओं की खुराक में इलेक्ट्रोलाइट्स एवं खनिज मिश्रण जोड़ने हेतु पशुपालकों को जागरूक किया जाए।
गौशालाओं, डेयरी फार्मों एवं अन्य पशु पालन केंद्रों में हीटवेव से बचाव हेतु प्राथमिक चिकित्सा किट उपलब्ध कराई जाए। पशु पालकों को पशुओं को दोपहर 12.00 से 4.00 बजे के बीच चराने से रोकने एवं अत्यधिक गर्मी में उनका श्रम कम करने की सलाह दी जाए। लू से प्रभावित पशुओं के त्वरित उपचार हेतु मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (चलित पशु चिकित्सा दल) सक्रिय किए जाएं। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाए, जिसमें पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, हीट स्ट्रेस से बचाव एवं टीकाकरण किया जाए। पशु पालन विभाग की ओर से पशु पालकों के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किया जाए, जहां से वे तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।
जिला अग्निशमन विभाग
नगर निगम, नगर पालिका एवं पंचायत क्षेत्रों के साथ समन्वय कर अग्निशमन दलों की उपलब्धता एवं तैनाती की समीक्षा की जाए। सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, अस्पतालों, पेट्रोल पंप, गैस गोदामों, स्कूलों, औद्योगिक क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाए एवं सुरक्षा उपायों की जांच सुनिश्चित की जाए। फायर ब्रिगेड वाहनों, जल स्रोतों एवं अग्निशमन उपकरणों की समय-समय पर जांच कर उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित की जाए। अत्यधिक गर्मी के दौरान संभावित अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर वन क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं को रोकने हेतु निगरानी बढ़ाई जाए एवं आवश्यक संसाधनों को तैयार रखा जाए। फायर ब्रिगेड स्टाफ एवं स्वयं सेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर उन्हें आपातकालीन स्थितियों से निपटने हेतु आवश्यक कौशल एवं रणनीति प्रदान की जाएं। एफएम रेडियो, मोबाइल मैसेजिंग एवं सोशल मीडिया के माध्यम से लू एवं आग लगने की घटनाओं से बचाव हेतु जनसपर्क अभियान चलाए जाए। अस्पतालों, स्कूलों, मल्टी-स्टोरी इमारतो एवं सार्वजनिक स्थलों में अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित की जाए। सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पेट्रोल पंप एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में अग्निशमन से संबंधित जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। स्थानीय निकायों, व्यापारिक संगठनों एवं औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठके कर फायर सेफ्टी एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
शहर, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अग्निशमन सेवा की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जाएं एवं किसी भी आपात स्थिति में न्यूनतम प्रतिक्रिया समय में फायर ब्रिगेड तैनात की जाए।
व्यस्त बाजार क्षेत्रों, औद्योगिक जोनों एवं रिहायशी इलाकों में विशेष फायर पेट्रोलिंग टीम तैनात की जाए ताकि आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके।
परिवहन विभाग
बस स्टैंड, टक टर्मिनल, टैक्सी स्टैंड एवं ऑटो स्टैंड पर शीतल पेयजल, छायादार विश्राम स्थल एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी बस चालकों, ट्रक चालकों एवं अन्य व्यावसायिक वाहन चालकों को लू से बचाव के उपायों, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने एवं लंबे समय तक सीधी धूप में वाहन न चलाने हेतु जागरूक किया जाए। सार्वजनिक एवं निजी परिवहन संचालकों को निर्देशित किया जाए कि वे यात्रियों को पर्याप्त वेंटिलेशन, पीने के पानी एवं छायादार वातावरण की सुविधा प्रदान करें। स्कूलों बसों एवं बच्चों के परिवहन के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किया जाएं, जिससे अत्यधिक गर्मी में बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।
सभी बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं प्रमुख यात्री प्रतीक्षालयों पर ओ. आर. एस वितरण केंद्र स्थापित किए जाएं। ट्रैफिक पुलिस एवं परिवहन विभाग द्वारा व्यावसायिक वाहन चालकों की स्वास्थ्य जांच हेतु विशेष शिविरों का आयोजन स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर किया जाए। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों एवं हाईवे पर एम्बुलेंस एवं प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं तैनात की जाएं, जिससे हीट स्ट्रोक से प्रभावित चालकों व यात्रियों को त्वरित उपचार मिल सके। टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप एवं प्रमुख हाईवे रूटों पर विश्राम केंद्रों की स्थापना की जाएं, जहां सुविधा प्राप्त कर सकें।









