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ममता बनर्जी के लिए सत्ता की राह इस बार सबसे कठिन! नबान्न बचाने में ये 5 फैक्टर बनेंगे रोड़ा, क्या फिर दिखेगा दीदी का करिश्मा?

Mamata Banerjee Challenges 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों की घड़ी जैसे-जैसे करीब आ रही है, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचा पायेंगी. जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 15 वर्षों के शासन के बाद इस बार दीदी के लिए डगर सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. भ्रष्टाचार के आरोपों से लेकर मजबूत होती विपक्षी भाजपा तक, कई ऐसे मोर्चे हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) घिरती नजर आ रही है.

1. भ्रष्टाचार के दाग और जांच एजेंसियों का शिकंजा

ममता बनर्जी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं. शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन घोटाला और कोयला तस्करी जैसे मामलों में पार्टी के कई दिग्गज नेता जेल में हैं. ईडी और सीबीआई की सक्रियता ने सरकार की छवि पर गहरा असर डाला है. जनता के बीच यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार निचले स्तर तक जड़ें जमा चुका है.

2. संदेशखाली और महिला सुरक्षा का मुद्दा

बंगाल में महिलाएं ममता बनर्जी का सबसे बड़ा वोट बैंक रही हैं. संदेशखाली और आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं ने इस भरोसे को हिलाकर रख दिया है. महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के आरोपों ने विपक्षी दलों को सरकार को घेरने का बड़ा हथियार दे दिया है. भाजपा लगातार महिला सुरक्षा को मुद्दा बनाकर टीएमसी के इस मजबूत किले में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है.

एंटी-इन्कम्बेंसी और प्रशासन पर सवाल

लगातार तीन कार्यकाल और 15 साल सत्ता में रहने के बाद किसी भी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) होना स्वाभाविक है. जमीनी स्तर पर तृणमूल कार्यकर्ताओं की दादागिरी और सिंडिकेट राज की शिकायतों ने आम लोगों में नाराजगी पैदा की है. सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बावजूद, प्रशासनिक भ्रष्टाचार एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है.

भाजपा का बढ़ता वोट शेयर और हिंदुत्व कार्ड

वर्ष 2011 में महज 4 प्रतिशत वोट शेयर वाली भाजपा आज बंगाल में मुख्य प्रतिद्वंद्वी है. वर्ष 2021 में 77 सीटें जीतने के बाद भाजपा का संगठन अब बूथ स्तर तक मजबूत हो चुका है. धार्मिक ध्रुवीकरण और हिंदुत्व के मुद्दे ने बंगाल की पारंपरिक राजनीति को बदल दिया है. उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे इलाकों में भाजपा की पकड़ टीएमसी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है.

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