Ro no D15139/23

आज है सूरदास जयंती, यहां देखे उनके भक्तिरस के दोहे

Surdas Jayanti 2026: सूरदास जयंती भगवान कृष्ण के महान भक्त और कवि संत सूरदास की जयंती के रूप में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन अवसर है। वर्ष 2026 में यह उत्सव 21 अप्रैल को मनाया जाएगा. इस दिन लाखों भक्त, विद्वान और भारतीय भक्ति साहित्य के प्रेमी संत सूरदास को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं. यह पर्व केवल उनकी काव्य प्रतिभा को सम्मान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान कृष्ण के प्रति उनकी अटूट भक्ति का भी उत्सव है.

सूरदास का जीवन और जन्म स्थान

संत सूरदास का जन्म 1478 ईस्वी में माना जाता है. उनके जन्म स्थान को लेकर अलग-अलग मत हैं—कुछ विद्वान उनका जन्म दिल्ली के पास सीही गांव में मानते हैं, जबकि कुछ आगरा के रुनकता को उनका जन्मस्थान बताते हैं। वे जन्म से ही दृष्टिहीन थे, लेकिन उनकी आंतरिक दृष्टि अत्यंत प्रखर थी.

बचपन में उन्हें अपनी दृष्टिहीनता के कारण अनेक कठिनाइयों और उपेक्षा का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, उनकी आध्यात्मिक चेतना बचपन से ही जागृत थी, जिसने आगे चलकर उन्हें भक्ति के मार्ग पर अग्रसर किया.

आध्यात्मिक मार्ग की शुरुआत

सूरदास के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उनकी भेंट महान संत वल्लभाचार्य से हुई. वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग संप्रदाय के संस्थापक थे. उनके मार्गदर्शन में सूरदास ने भगवान कृष्ण की भक्ति को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया. इसके बाद उन्होंने भक्ति गीतों और पदों की रचना प्रारंभ की, जिनमें कृष्ण की बाल लीलाओं, प्रेम और करुणा का अद्भुत चित्रण मिलता है.

साहित्यिक योगदान और प्रमुख कृतियां

सूरदास की रचनाएं भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं. उनकी प्रमुख कृतियों में सूर सागर, सूर सारावली और साहित्य लहरी शामिल हैं.

“सूर सागर” विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत जीवंत और भावनात्मक वर्णन मिलता है। उनकी भाषा सरल, मधुर और हृदय को छू लेने वाली है, जिससे हर वर्ग का व्यक्ति उनसे जुड़ पाता है.

सूरदास के पदों में भक्ति का संदेश

सूरदास के पदों में भक्ति, प्रेम और जीवन की गहरी सच्चाइयाँ झलकती हैं। उदाहरण के रूप में:

“जो पै जिय लज्जा नहीं, कहा कहौं सौ बार।
एकहु अंक न हरि भजे, रे सठ ‘सूर’ गँवार॥”

इस पद में वे कहते हैं कि जो व्यक्ति भगवान का स्मरण नहीं करता, वह जीवन के मूल उद्देश्य से दूर है.

इसी प्रकार एक अन्य पद में वे प्रेम की गहराई को दर्शाते हैं:

“मीन वियोग न सहि सकै, नीर न पूछै बात.”

यहाँ मछली और पानी के उदाहरण से वे सच्चे प्रेम और भक्ति का महत्व बताते हैं.

सूरदास जयंती का महत्व

सूरदास जयंती केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है. यह दिन हमें सिखाता है कि शारीरिक सीमाएँ कभी भी आंतरिक शक्ति और भक्ति के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं. उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से कोई भी व्यक्ति ईश्वर के निकट पहुंच सकता है.

पूरे भारत में कैसे मनाई जाती है जयंती

इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। भक्त सूरदास के पदों का गायन करते हैं और कृष्ण भक्ति में लीन हो जाते हैं. विद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में भी उनके जीवन और साहित्य पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर प्रवचन और संगोष्ठियां भी होती हैं, जहाँ उनके योगदान पर चर्चा की जाती है.

संत सूरदास का जीवन और उनकी रचनाएं आज भी लोगों को भक्ति और प्रेम का मार्ग दिखाती हैं. सूरदास जयंती हमें उनके विचारों और शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का अवसर देती है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति में ही जीवन का वास्तविक आनंद और शांति छिपी होती है.

  • Related Posts

    कितना बचेगा गांधी परिवार-कानूनी हथकण्डों से,रहा गुलशन तो फूल खिलेंगे-रहा तृणमूल तो फिर मिलेंगे,मछली के नाम पे छली जाएगी जनता ? वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….

      मुख्त्यार अंसारी और अतीक अहमद के केस की सुनवाई करने वाले जज भागते फिरते थे। कोई तबादला करवा लेता था तो कोई छुट्टी पे चल देता था। माननीय न्यायाधीशों…

    Read more

    बद्रीनाथ मंदिर के खुलने वाले है कपाट, जानें कब तक होंगे भगवान बद्रीविशाल के भक्तों को दर्शन

    आशीष ध्यानी, पंडा, बद्रीनाथ धाम Badrinath Temple: मान्यता है कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं. हालांकि पंचांग के अनुसार तारीख एक-दो दिन आगे-पीछे…

    Read more

    NATIONAL

    कितना बचेगा गांधी परिवार-कानूनी हथकण्डों से,रहा गुलशन तो फूल खिलेंगे-रहा तृणमूल तो फिर मिलेंगे,मछली के नाम पे छली जाएगी जनता ? वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….

    कितना बचेगा गांधी परिवार-कानूनी हथकण्डों से,रहा गुलशन तो फूल खिलेंगे-रहा तृणमूल तो फिर मिलेंगे,मछली के नाम पे छली जाएगी जनता ? वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….

    बद्रीनाथ मंदिर के खुलने वाले है कपाट, जानें कब तक होंगे भगवान बद्रीविशाल के भक्तों को दर्शन

    बद्रीनाथ मंदिर के खुलने वाले है कपाट, जानें कब तक होंगे भगवान बद्रीविशाल के भक्तों को दर्शन

    Tim Cook का युग खत्म, अब John Ternus के हाथ में होगी Apple की कमान

    Tim Cook का युग खत्म, अब John Ternus के हाथ में होगी Apple की कमान

    Iran War : बातचीत अधर में अटकी? ट्रंप का दावा- ईरान के परमाणु ठिकाने ‘खाक’

    Iran War : बातचीत अधर में अटकी? ट्रंप का दावा- ईरान के परमाणु ठिकाने ‘खाक’

    JDU विधायक दल का नेता कौन होगा? जानिए किसका नाम है सबसे आगे

    JDU विधायक दल का नेता कौन होगा? जानिए किसका नाम है सबसे आगे

    ईरान में तख्तापलट की आहट: IRGC के पास देश की कमान, विदेश मंत्री अराघची साइडलाइन; अब क्या करेगा अमेरिका?

    ईरान में तख्तापलट की आहट: IRGC के पास देश की कमान, विदेश मंत्री अराघची साइडलाइन; अब क्या करेगा अमेरिका?