
अकाल मृत्यु यानी समय से पहले होने वाली मृत्यु. जिस व्यक्ति पर इसका दोष लगता है, उसकी मृत्यु तय समय से पहले हो जाती है. कई लोगों का मानना है कि यह भी भगवान द्वारा पहले से तय होती है, लेकिन क्या यह सोच सच में सही है या इसके पीछे कोई रहस्य छिपा है? आइए, इन सवालों के जवाब प्रेमानंद जी महाराज के माध्यम से जानते हैं
शास्त्रों में बताया गया है कि व्यक्ति के जन्म के साथ ही उसकी मृत्यु तय होती है. यह जीवन का वह सत्य है, जिसे बदला नहीं जा सकता. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन पर अकाल मृत्यु का दोष होता है, यानी ऐसे लोग जो समय से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. ऐसा क्यों होता है? क्या अकाल मृत्यु भी पहले से तय रहती है? आइए इन सभी सवालों के जवाब प्रेमानंद जी महाराज के माध्यम से जानते हैं.
क्या अकाल मृत्यु भी पहले से तय रहती है?
प्रेमानंद जी से एक व्यक्ति ने सवाल पूछा कि क्या सामान्य मृत्यु की तरह अकाल मृत्यु भी पहले से तय रहती है? इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा—
अकाल मृत्यु पहले से तय नहीं होती. अकाल मृत्यु व्यक्ति के कर्मों के कारण होती है. यदि किसी से कोई बड़ा पाप हो जाए, तो दंड के रूप में उसे यह सजा मिलती है.
छोटे बच्चों की अकाल मृत्यु क्यों होती है?
प्रेमानंद महाराज का जवाब सुनने के बाद उस व्यक्ति ने पूछा ‘महाराज, छोटे बच्चों पर भी कई बार अकाल मृत्यु का दोष होता है. इतनी कम उम्र में उनसे क्या पाप होता है?’
इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा ‘इसका संबंध बालक के पिछले जन्म के कर्मों से होता है. भले ही वह इस जन्म में बच्चा हो, लेकिन पिछले जन्म में उसने कोई ऐसा महापाप किया होगा, जिसकी सजा उसे इस जन्म में मिल रही है. उनका कहना है कि आत्मा कभी नहीं मरती और न ही उसके कर्म नष्ट होते हैं. आत्मा भले ही शरीर बदल ले, लेकिन उसके कर्मों का पूरा हिसाब भगवान के पास रहता है और समय आने पर उसका दंड अवश्य मिलता है.’








