
इस वर्ष गर्मी ने सामान्य मौसम की सीमा को पार कर दिया है। दोपहर की सड़कें खाली दिखती हैं, लोग घरों में रहने को मजबूर हैं और अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी समस्याओं वाले मरीज बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन गर्मी को केवल “मौसम” मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। यह सीधे हमारे स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।
सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों पर पड़ता है। बच्चों में शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता वयस्कों की तुलना में कम होती है। ऐसे में डिहाइड्रेशन, कमजोरी, उल्टी, चिड़चिड़ापन और गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक तक हो सकता है।
गर्मी के मौसम में अक्सर लोग एक गलती करते हैं— प्यास लगने का इंतजार। जबकि शरीर में पानी की कमी शुरू होने के बाद प्यास महसूस होती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। बच्चों को बार-बार पानी, घर का बना तरल आहार, नारियल पानी, छाछ या नींबू पानी देना लाभकारी हो सकता है।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि हर समय ठंडा पेय या बाहर मिलने वाले रंगीन ड्रिंक्स शरीर के लिए अच्छे नहीं होते। इनमें चीनी अधिक हो सकती है और कई बार ये डिहाइड्रेशन को और बढ़ा देते हैं।
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, सिर ढकें और पानी साथ रखें।
बच्चों में यदि तेज बुखार, बार-बार उल्टी, बहुत ज्यादा सुस्ती, पेशाब कम होना, सांस तेज चलना या बच्चा सामान्य व्यवहार न कर रहा हो तो इसे सिर्फ “गर्मी लग गई” कहकर नजरअंदाज न करें और डॉक्टर की सलाह लें।
गर्मी हर साल आती है, लेकिन सावधानी हर बार जरूरी होती है। छोटी-छोटी आदतें— पर्याप्त पानी, सही समय पर बाहर निकलना और बच्चों पर विशेष ध्यान— कई बड़ी समस्याओं से बचा सकती हैं।
स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें।
डॉ. अभिषेक खंडेलवाल
बाल रोग विशेषज्ञ
माँ अहिल्या पीडियाट्रिक एवं ENT केयर, चौबे कॉलोनी, रायपुर








