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मंदिरों की रक्षा और सुव्यवस्था के लिए ‘मंदिर महासंघ छत्तीसगढ़’ की स्थापना!

 

मंदिरों की रक्षा और सुव्यवस्था के लिए ‘मंदिर महासंघ छत्तीसगढ़’ की स्थापना!

रायपुर (छत्तीसगढ़): मंदिर हिंदू धर्म की मूलभूत आधारशिला और चैतन्य के स्रोत हैं। मंदिरों के माध्यम से सभी मंदिर न्यासियों, पुजारियों और पुरोहितों का प्रभावी संगठन बनाने, मंदिरों के प्रबंधन, सुरक्षा तथा मंदिरों को सनातन धर्म प्रचार का केंद्र बनाने के उद्देश्य से ‘मंदिर महासंघ’ का कार्य अब छत्तीसगढ़ राज्य में विस्तारित हो रहा है। इस संदर्भ में हाल ही में छत्तीसगढ़ में 80 से अधिक मंदिरों के न्यासियों की बैठक संपन्न हुई, जिसमें निर्णय लिए गए। इसी कड़ी में अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर 19 अप्रैल को ‘मंदिर महासंघ छत्तीसगढ़’ की औपचारिक स्थापना की जाएगी और जून माह में राज्य में एक भव्य ‘मंदिर न्यास परिषद’ का आयोजन किया जाएगा। यह घोषणा मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संघटक श्री. सुनील घनवट ने प्रेस क्लब, रायपुर, छत्तीसगढ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में की।

इस पत्रकार वार्ता में मंदिर महासंघ छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला संयोजक श्री. मदन मोहन उपाध्याय, सह-संयोजक श्री. प्रवेश तिवारी, हिंदू जनजागृति समिति के श्री. कमल बिस्वाल, श्री. हेमंत कानसकर, श्री. आशीष परेड़ा, श्री. रोहित तिरंगा तथा नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पूज्य श्री. नीलकंठ त्रिपाठी महाराज उपस्थित थे।

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए श्री. सुनील घनवट ने कहा कि अब तक महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में 17,000 से अधिक मंदिर, न्यासी और पुजारी इस महासंघ से जुड़ चुके हैं। मंदिर महासंघ का मुख्य ध्येय सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों को मुक्त कर उन्हें भक्तों को सौंपना है। इसके साथ ही मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए वहां ‘वस्त्र संहिता’ (ड्रेस कोड) लागू करना और मंदिर संस्कृति पर होने वाले हर आघात का संवैधानिक मार्ग से उत्तर देना यह महासंघ की प्राथमिकता है। महासंघ ने सरकार से मांग की है कि मंदिरों और मठों की हड़पी गई भूमि को मुक्त कराने के लिए कठोर ‘एन्टी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ लागू किया जाए और वक़्फ बोर्ड के अवैध कब्ज़े से मंदिरों की भूमि छुड़ाई जाए। साथ ही, भक्तों द्वारा मंदिरों को दान में दी गई भूमि पर लगने वाले ‘मुद्रांक शुल्क’ (स्टैम्प ड्यूटी) को पूर्णतः समाप्त करने की भी मांग की जा रही है।

छत्तीसगढ़ की स्थानीय समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में मंदिरों और मठों की भूमि पर अवैध अतिक्रमण, उनकी अवैध बिक्री और हस्तांतरण जैसी गंभीर समस्याएं हैं। इसी संदर्भ में छत्तीसगढ़ में एन्टी लैंड ग्रॅबिंग ऍक्ट बने तथा आपातकालीन स्थितियों में मंदिरों को अपेक्षित सहायता न मिलने जैसी बाधाओं को दूर करने के लिए मंदिर महासंघ सक्रिय रूप से कार्य करेगा। इसके लिए पूरे राज्य में मंदिर न्यासियों, पुरोहितों और पुजारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि मंदिर प्रबंधन और धार्मिक विधि शास्त्रोक्त पद्धति से संपन्न हों।

रायपुर जिला संयोजक श्री. मदनमोहन उपाध्याय ने आगे बताया कि मंदिर महासंघ छत्तीसगढ़ में मंदिरों के संगठन को सशक्त करने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है। इसी के अंतर्गत पूरे प्रदेश में व्यापक संपर्क अभियान चलाकर मंदिर न्यासियों और पुजारियों से भेंट की गई है। इस अभियान को और अधिक गति देते हुए जून माह में भव्य मंदिर-न्यास परिषद का आयोजन होगा, जिससे प्रदेश के सभी मंदिरों को एक सूत्र में पिरोकर उनकी रक्षा सुनिश्चित की जा सके। मंदिर महासंघ ने प्रदेश के सभी मंदिर प्रतिनिधियों से इस धर्म-कार्य में सम्मिलित होने का आह्वान किया है।

आपका नम्र,
श्री मदनमोहन उपाध्याय,
रायपुर जिला संयोजक,
मंदिर महासंघ, छत्तीसगढ़. संपर्क क्र.- 9826114446

श्री हेमंत कानसकर,
समन्वयक,
हिंदू जनजागृति समिति छत्तीसगढ़
संपर्क क्र.-7587103701

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