
जीवन में कभी-कभी ऐसे वाकये हो जाते हैं कि मन खुश हो जाता है। ऐसा ही मजेदार वाकया हुआ केरल में जिससे कुदरत के इंसाफ पर भी भरोसा हो गया।
एक फिल्म जैसी सच्ची कहानी सुनाते हैं। हुआ यूं कि एक स्मग्लर अपनी चड्डी में नशीले आईटम छिपाकर ला रहा था जो तिरूअनंतपुरम् एयरपोर्ट पर पकड़ा गया। केस चला। निचली कोर्ट ने उसे दस साल की सजा भी सुना दी।
इस फिल्मी कहानी में बेहद चालाक-चतुर वकील भी था जिसने आदेश होने के बाद, पूर्व नियोजित प्रोग्राम के अनुसार कोर्ट से आरोपी का सामान यानि चड्डी वापस मांगी। नियमानुसार उसे उसका सामन वापस मिल गया।
तब वकील ने बेहद चतुराई से कोर्ट के बाबू के साथ मिलकर खेल खेला। उसने चड्डी का असल रूप बदलकर उसे छोटा कर दिया और साथ ही जैसा कि होता है सजा होने के बाद आरोपी हाईकोर्ट में अपील करता है इन्होंने भी अपील कर दी।
हाईकोर्ट में वकील ने दलील दी कि जिस चड्डी से ड्रग्स बरामद दिखाये गये हैं वो आरोपी को आ ही नहीं सकती। जब प्रैक्टिल किया गया और आरोपी को चड्डी पहनाकर देखी गयी तो वो आई ही नहीं।
क्यांेकि वकील ने तो उसे पहले ही सुनियोजित तरीके से काटकर छोटा कर दिया था। इस तरह पर्याप्त सबूत न होने के कारण हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।
समय बीतता गया और वो चतुर वकील अपनी चतुराई से राजनीति में भी सफल होता चला
गया और फिर एक समय केरल में मंत्री बन गया और वर्तमान में विधायक है नाम है एंटनी राजू।
इस कहानी का एक पार्ट और भी है। पुलिस को जब हाईकोर्ट से डोज़ मिला तो उसने जांच शुरू कर दी जांच में पाया गया कि चड्डी को काटकर छोटा किया गया था ताकि वो आरोपी को आ न सके। अंततः इस बात को पुलिस ने कोर्ट में साबित कर दिया और वकील से मंत्री और विधायक बने राजू को दोषी करार दिया गया। 36 साल के बाद।
कानून के हाथ लंबे होते हैं सुना था, अब देखा और ये भी देखा कि कर्मों का फल कभी न कभी कहीं न कहीं मिलता जरूर है।
जांजगीर चांपा जिले के जैजेपुर क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक बालेश्वर साहू भी किसान से धोखाधड़ी के मामले में जेल गये। मामला 20 साल पुराना है।

सुनी है कभी सांप, नेवले में दोस्ती ?
अब देख लीेजिये
महाराष्ट्र में जब शिवसेना ने कांग्रेस से गलबहियां की थीं तो बड़ा कोसा था सारे देश ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को, खास तौर पर भाजपा के लोगों ने। शिवसेना संस्थापक और उद्धव ठाकरे के पिता बाला साहेब ठाकरे कहा करते थे कि ‘कोई हिजड़ा ही होगा जो कांग्रेस से समझौता करेगा’।
ऐसे खानदान का वंशज होकर उद्धव ने मौका पड़ने पर कांग्रेस से समझौता कर लिया और केवल कुर्सी के लिये अपने मुकाम से गिर गये। हालांकि ये सच है कि उन्होंने इतिहास में अपना नाम मुख्यमंत्री के तौर पर दर्ज करा लिया मगर अपना राजनैतिक वजूद लगभग समाप्त कर दिया।
बहरहाल उस समय उन्हें कोसने वाली भाजपा को क्या कहा जाए जो न सिर्फ अपनी वैचारिक खानदानी कट्टर दुश्मन कांग्रेस और उससे भी अधिक फूटी आंखो न सुहाने वाली ओवेसी की पार्टी से समझौता कर लिया ? जी हां भाजपा और कांग्रेस की दोस्ती….. सपने मंे भी असंभव लगती है। मगर कुर्सी की खातिर कर ली नेताओं ने…..
हा… हा… हा… हा…. कुर्सी जो न कराए वो कम है।
महाराष्ट्र में अंबरनाथ और अकोट विधान परिषद् में अपना वर्चस्व बनाने के लिये भाजपा ने कांग्रेस और ओवेसी से गठबंधन कर लिया। लगा जैसे सांप और नेवले ने दोस्ती कर ली।

बाद में जब भाजपाई मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने लोकल नेताओं को फटकार लगाई और इस गठजोड़ को निरस्त करने को कहा तब जाकर मुंह दिखाने के काबिल बने। कांग्रेस ने भी अपने सारे पार्षदों को निलंबित कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया
कपिल सिब्बल को
कुत्तों की काउंसलिंग का मशवरा

सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों की हरकतांे से ‘जानें’ जाने के मामले पर नाराजगी जताई तो झट से कपिल सिब्बल कुत्तों के बचाव में खड़े हो गये। बोले ‘मुझे तो कभी कुत्तों ने नहीं काटा’। ऐसे ही किसी तर्क पर मजाकिया अंदाज में कोर्ट ने कहा ‘बस अब कुत्तों को काउंसलिंग देना बाकी रह गया है, ताकि छोड़े जाने के बाद वे न काटें’।
ये कोर्ट ने एक नया विषय दे दिया। चर्चा है कि सिब्बल साहब जैसे विद्वान और बुद्धिजीवी लोग नसबंदी हो चुके कुत्तों की क्लास लेंगे कि ‘ऐसा क्यांे करते हो भाई, अच्छा लगता है क्या ऐसा करना, देखो कैसी नाक कट रही है ? अच्छा बच्चा है न…. आईंदा ऐसा मत करना। समझे। ————————–
जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700






